वैशाख पूर्णिमा के दिन सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा उकेर मनायी जयंती*

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📝SUBHAKAR KUMAR📆10/05/2017

घोड़ासहन, संवाद सहयोगी : भगवान बुद्ध के सन्देश हमें प्रेम, भातृत्व, त्याग, विनम्रता और चीत की परिशुद्धि की प्रेरणा देते हैं। 
सामाजिक समानता, सद्भावना, अनुभवपरक बौद्धिकता, मधुर वचन, अहिंसा सच्चरित्रता आदि भगवान भगवन बुद्ध के जीवन- दर्शन के सार तत्व हैं, जिनका अनुसरण मानवता के लिए अत्यंत श्रेयस्कर हैं। इस कथन को स्मरण करते पूर्वी चम्पारण जिले के भारत- नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र घोड़ासहन में चर्चित सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने कुछ इस तरह बालू की रेत पर महात्मा बुद्ध की जयंती मनाई। जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहीं। बता दे की वैशाख पूर्णिमा के दिन ही राजकुमार सिदार्थ का जन्म 563 ई पू में नेपाल के लुम्बिनी हुआ था, जो बाद में भगवन बुद्ध के रूप में विख्यात हुए। उन्हें बोधगया में पीपल पेड़ के निचे बोधिसत्व की प्राप्ति हुई थी। इसलिए वैशाख पूर्णिमा के दिन को बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता हैं। मौके पर अंग्रेजी विभागाध्यक्ष  प्रो लालबाबू सिंह, पूर्व प्रधानाध्यापक विद्यानंद प्रसाद, बीएमसी मुनेन्द्र कुमार, डॉ फकरे आलम, डॉ मधुकर, समाजसेवी राहुल कुमार, शिक्षक ललन प्रसाद, ई मुरारी कुमार, जालंधर पटेल, सिकिन्द्र पटेल, सुनील कुमार, राकेश पंडित, चन्दन पटेल समेत सैकड़ो शिक्षाविद व् प्रबुद्ध लोगों ने मधुरेंद्र की कला का प्रसंशा करते बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर भगवन बुद्ध को सादर नमन किया।

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